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हैदराबाद विश्वविद्‌यालय, मानविकी संकाय के तुलनात्मक साहित्य केन्द्र ने अपने रजत जयंती समारोह के क्रम में सोमवार, 24 फरवरी, 2014 को है.वि.वि. के मानविकी संकाय के सभागार में एक साहित्यिक समारोह का आयोजन किया. उद्‌घाटन सत्र की अध्यक्षता मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. अमिताभ दासगुप्ता ने की. केन्द्र की पीएच.डी. छात्रा बिविता एसो ने परिचय प्रस्तुत किया और निदेशक प्रो. एम.टी. अन्सारी ने सभा का स्वागत किया. हैदराबाद विश्वविद्‌यालय के कुलपति प्रो. रामकृष्ण रामस्वामी ने उद्‌घाटन सत्र में सबको संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी भाषा और साहित्य को सहेजकर रखना होगा, जिसमें तुलनात्मक साहित्य का केन्द्र सहायक सिद्‌ध हो सकता है. केन्द्र के एक शोधार्थी अबु सलेह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.

इसके बाद के सत्र में होशांग मर्चंट, जमीला निशात, सच्चिदानंद चतुर्वेदी एवं तुम्मला रामकृष्णा जैसे प्रतिष्ठित कवियों एवं लेखकों ने अपनी कविताओं और लघुकथाओं का पाठ किया. इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. शशि मुदिराज ने की. होशांग मर्चंट ने अपने अलग अंदाज़ में अपनी कुछ अंग्रेज़ी कविताएं कहीं तो जमीला निशात ने कुछ बेहतरीन उर्दू नज़्में पेश कीं. चतुर्वेदी जी और रामकृष्ण जी ने हिंदी और तेलुगु में अपनी बात कह कर श्रोताओं का दिल जीत लिया.

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प्रो. आर.एस. सर्राजू की अध्यक्षता में संपन्न दूसरा सत्र भी कुछ कम आकर्षक नहीं था, जिसमें तेलुगु, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी के कवियों – शिखामणि संजीव राव, मुज़फ्फर अली शाहमिरी, हरजिंदर सिंह और श्रीदल स्वामी – ने भाग लिया. विश्वव्यापी मानवीय अभिव्यक्ति की बात हुई और विश्वव्यापक मानवीय अभिव्याक्ति की शक्ति पर प्रश्नचिह्‌न लगाए गए. साथ ही, अंग्रेज़ी में क्या अनूदित हो सकता है और क्या नहीं इस विषय पर भी चर्चा की गई.

तीसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. अल्लादि उमा ने की. वोल्गा, सुभाद्रा जुपका, एम. श्रीधर और हुमा किदवई जैसे तेलुगु, अंग्रेज़ी और उर्दू के कवियों ने शिरकत की. चौथे सत्र की अध्यक्षता डॉ. उषा रामन ने की जिसमें श्री. मुजतबा हुसैन, खालिद सईद, एस.के.वाई. बाबा एवं गोगु श्यामला जैसे विख्यात लेखकों और कवियों ने भाग लिया. मानविकी संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मोहन जी. रमणन की अध्यक्षता वाला अंतिम सत्र संभवत: सबसे महत्वपूर्ण था, जिसमें विद्‌यार्थियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं.

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