हैदराबाद विश्वविद्यालय सामाजिक विज्ञान संकाय, महिला अध्ययन केंद्र ने 10 फरवरी, 2017 को सामाजिक विज्ञान संकाय के न्यू सेमिनार हॉल, में प्रो. निवेदिता मेनन द्वारा ‘प्रतिनिधि संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण: जाति, लिंग और नारीवादी राजनीति’ नामक विषय पर एक टॉक का आयोजन किया.

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विख्यात स्त्री अधिकारवादी कार्यकर्ता, लेखिका, अनुवादक और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, राजनीतिक विज्ञान की प्रख्यात प्रोफेसर नंदिता मेनन ने भारतीय विधायिकाओं में महिला आरक्षण की मौलिक प्रणाली में सुधार लाने के बारे में तर्कसंगत चर्चा की. इसके अलावा उन्होंने समान अवसर के रूपांकनों पर भी प्रकाश डाला.

इस अवसर पर उन्होंने अपना मत बताते हुए कहा कि “नारीवाद का अर्थ केवल महिलाओं को शामिल करना ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों को अर्थात ऊंची जाति के पूँजीवादी समेत नारीवाद को आदर्श मानने वाले सभी को इसके लिए समाहित करना चाहिए. यह समान अवसरों के लिए लड़ी जाने वाली आम लडाई नहीं है, बल्कि इसके विपरीत सामाजिक सशक्तीकरण और महिलाओं के सामाजिक न्याय की लड़ाई है”. इसके बाद एक इंटरैक्टिव सत्र चला, जिसमें प्रो. मेनन ने छात्रों और शिक्षकों द्वारा पूछी गई शंकाओं का समाधान किया.

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प्रो. मेनन भारतीय नारीवादी सिद्धांत के अग्रदूतों में से एक के रूप में जानी जाती हैं. आप भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में व्यापक रूप से लेख एवं पुस्तकें प्रकाशित करती रहती हैं. आप आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक Kafila.org सहित जानी-मानी सभी पत्र-पत्रिकाओं में समकालीन मुद्दों पर अपनी सक्रिय टिप्पणियाँ प्रस्तुत करती रहती हैं.

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