भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री. राम नाथ कोविंद जी ने राष्ट्रपति भवन में 17 दिसंबर, 2019 को केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, IISERs और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू के निदेशकों के सम्मेलन की अध्यक्षता की.

इस अवसर पर अभिभाषण देते हुए, राष्ट्रपति जी ने कहा कि हमारे केंद्रीय विश्वविद्यालयों का उद्देश्य लगातार विकसित होना और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक मानकों के अनुरूप अपने आपको उन्नत करना होना चाहिए. इस क्षेत्र में कुलपति और निदेशकों को नेतृत्व प्रदान करना होगा. एक तत्काल लक्ष्य के रूप में उन्हें देश में सर्वश्रेष्ठ बनने और एक दूसरे के साथ स्वस्थ तरीके से प्रतिस्पर्धा करने का प्रयास करना चाहिए. साथ ही, उनमें दुनिया में सर्वश्रेष्ठ से प्रतिस्पर्धा करने की इच्छा होनी चाहिए. लेकिन प्रतिस्पर्धा के इस स्तर को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे आपस में, अन्य राज्य और निजी विश्वविद्यालयों के बीच परस्पर सहयोग करें और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखें.

राष्ट्रपति जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और संस्थानों के नेताओं के रूप में कुलपतियों और निदेशकों को भी अपने छात्रों में नेतृत्व के गुणों को विकसित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कक्षाओं और प्रयोगशालाओं से परे, छात्रों को एनएसएस या अन्य क्लबों के माध्यम से सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. जो विश्वविद्यालय पिछड़े क्षेत्रों में स्थित हैं, उन पर आसपास के समुदायों के साथ काम करने की एक विशेष जिम्मेदारी होती है. उन्होंने कहा कि शैक्षणिक समुदाय और स्थानीय उद्योग के बीच सार्थक संबंध विकसित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. छात्रों को रोज़गार की अपेक्षा रखने वालों के बजाय रोज़गार के निर्माता के रूप में उभरने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने संबंधी मुद्दों पर संस्थानों के प्रमुखों के विभिन्न उप समूहों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गईं जैसे कि उद्योग-अकादमिक संपर्क; रिक्तियों को भरना; पूर्व-छात्रों द्वारा दी गई दान निधि और उनका इस्तेमाल करना और मूलभूत सुविधाओं की परियोजनाओं को पूर्ण करना इत्यादि. है.वि.वि. के कुलपति प्रो. अप्पा राव पोदिले जी ने भी इस सम्मेलन में भाग लेकर विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई अच्छी पद्धतियों पर एक प्रस्तुति दी.

बाद में, सम्मेलन के समापन-सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्चतर शिक्षा संस्थानों को हमारे राष्ट्र और हमारे समाज के सामने आने वाली विशिष्ट चुनौतियों का सामना करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए. इनमें से कई चुनौतियों के लिए रचनात्मक और नवीन समाधानों की आवश्यकता होती है. यह सुनिश्चित करना उनका सर्वोपरि कर्तव्य है कि उनके परिसरों में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और विचारों को प्रोत्साहन दिया जाए, जहाँ प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाता हो और विफलता का उपहास नहीं किया जाता बल्कि सीखने की प्रकिया के रूप में उसे देखा जाता हो. इसके अलावा, विश्वविद्यालयों को ऐसी प्रयोगशालाओं के रूप में उभरना चाहिए जहाँ छात्रों को राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक समस्या-समाधान की शिक्षा मिल सके.

राष्ट्रपति जी ने कहा कि छात्रों को एक विशिष्ट सामुदायिक कार्य के साथ शैक्षणिक और पाठ्येतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में समुदाय-उन्मुख परियोजनाओं को सम्मिलित करने के विशेष प्रयास करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व को हमारे अकादमिक समुदाय के डीएनए के अभिन्न हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए.

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