हैदराबाद विश्वविद्यालय के जैव-विविधता संरक्षण समूह ‘वाइल्ड लेंस’ ने स्वच्छता और बागवानी विभाग के कर्मचारियों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर झील सफाई अभियान (लेक क्लीन ड्राइव) का आयोजन किया. 5 जून को संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में घोषित किया गया है. हर साल यह समूह इस अवसर पर वृक्षारोपण अभियान चलाता है. इस साल उन्होंने बफेलो झील की सफाई का अभियान चलाया. लगभग 50 से अधिक स्वयंसेवकों ने परिसर की झीलों को स्वच्छ और सुंदर बनाने का काम किया.

इस तरह की नियमित क्लीन अप और सफाई गतिविधियाँ पानी की प्रतिधारण क्षमता और पानी की गुणवत्ता में सुधार करती हैं. ऐसा पानी वन्यजीवों द्वारा पीने के लिए उपयुक्त होता है.

‘वाइल्ड लेंस’ के संस्थापक, डॉ. रवि जिल्लपल्ली कहते हैं, “हमने 2016 में झील की सफाई का अभियान शुरू किया था, जिसकी आदर्शोक्ति है – ‘हमारा परिसर- हमारी जिम्मेदारी’. झीलें हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण अंग होती हैं और उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता है. हालाँकि आजकल उन्हें कचरा और मल-जल फेंकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

हैदराबाद विश्वविद्यालय में 200 से अधिक पक्षियों, स्तनधारी जीवों और साँपों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं. ये सभी अपनी दैनिक पानी की जरूरतों के लिए पीकॉक और बफेलो झीलों पर निर्भर होते हैं. झीलों को पुनर्जीवित करना और प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की जाँच करना हमारी ज़िम्मेदारी है. मैं माननीय कुलपति, प्रो. अप्पा राव पोदिले को धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इस अच्छे काम में भाग लेने के लिए कर्मचारियों को निदेश दिया. मैं उप-कुलसचिव श्री. श्रीनिवास राव, बागवानी कर्मचारी- श्री. चंद्र प्रकाश शर्मा, श्री. वी. सुब्बा राव, स्वच्छता विभाग के कर्मचारी – श्री. मल्लेश के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस कार्यक्रम के लिए आवश्यक उपकरण और कर्मचारी उपलब्ध करवाए.”

उप-कुलसचिव श्री. श्रीनिवास राव कहते हैं, “यह एक अच्छी पहल है तथा हमारी झीलों के संरक्षण के लिए नियमित रूप से ऐसे सफाई अभियान चलाए जाने चाहिए.” परिसर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए वे एरिया एडॉप्शन प्रोग्राम्स के अधीन स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े छात्रों के साथ काम करेंगे.

श्री. कार्तिक जिर्रा, श्री. रघु घनपुरम, सुश्री. सुषमा नंद्याला, सुश्री. साई लक्ष्मी, श्री. यशस्वी येनुगु, सुश्री. एम प्रियंका, सुश्री. उषा रवींद्र, श्री. अनिल जी.आर., श्री. मनोरंजन, श्री. रोहित बॉन्ड आदि स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया.

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